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तहसील परिसर खागा में फहराया गया राष्ट्रीय ध्वज

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Crime24hours/समाचार संपादक उत्तर प्रदेश आलोक कुमार केशरवानी

खागा फतेहपुर ::-73 वा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज हिंदुस्तान के हर कोने में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया लोग सुबह से एक दूसरे को शुभकामनाएं देते नज़र आये।

तहसील परिसर खागा में आठ बजते ही उपजिलाधिकारी महोदय विनय कुमार गुप्ता जी के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया तदोपरान्त राष्ट्रीय गीत और इस राष्ट्रीय पर्व में मीटिंग हाल में संगोष्ठी का कार्यक्रम रखा गया जिसमें सभी वक्ताओ ने अपने विचार प्रकट किए सुरेंद्र सिंह,शिवकुमार सिंह,संगीता सिंह,योगेंद्र,शिवप्रसाद सक्सेना,अर्चना सिंह,आलोक लेखपाल,महेन्द्र नाथ त्रिपाठी राजस्व विभाग एवं कार्यक्रम संचालक,दिनेश सिंह अध्यक्ष,रमेश चंद्र पांडेय नायब तहसीलदार,तहसीलदार शशि भूषण मिश्र,उपजिलाधिकारी विनय कुमार गुप्ता सहित सैकङो लोग उपस्थित रहे।

उपजिलाधिकारी महोदय विनय कुमार गुप्ता जी ने कहा कि हम ये सोचते है कि मोदी जी ने और योगी जी ने देश के लिए क्या किया अरे हमे ये सोचना चाहिए कि हम ने देश के लिए क्या योगदान दिया साथ ही ये भी कहा कि वक़्त की कीमत बहुत है जिस ने वक़्त को नही पहचाना वक़्त ने उसे नही पहचाना हम जिस ओहदे में बैठे हैं वही से देश सेवा कर सकते है ज़रूरी नहीं कि हम देश सेवा के लिए सैनिक बने । हमारी पहचान ही हमारी प्रतिष्ठा बने उन्होंने बताया कि हम रोज़ काम करते है जो भी व्यक्ति हमारे पास आता है उसे हम शिकायत कर्ता की नज़र से देखते है हम ये क्यों नहीं सोचते कि वो पीड़ित व्यक्ति है उसकी पीड़ा हम जितना कम समय मे हो उतना दूर कर दे ।

दुनिया में हर आज़ाद देश का अपना एक झंडा होता है. झंडा एक स्वतंत्र देश का प्रतीक है. 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी से कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक के दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज के वर्तमान स्वरूप को अपनाया गया था. इसके बाद यह 26 जनवरी, 1950 को संप्रभु गणतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया. ध्वज में तीन रंग के होने की वजह से इसे ‘तिरंगा’ भी कहते हैं.

भारत के राष्ट्रीय ध्वज शीर्ष पर केसरिया रंग की क्षैतिज पट्टी होती है, जो बीच में सफेद और गहरे हरे रंग के बराबर अनुपात में बांटी गई है.

ध्वज की चौड़ाई की लंबाई का अनुपात 2:3 है. सफेद पट्टी के केंद्र में एक नीले रंग का च्रक है जिसमें 24 तिल्लियां हैं. इस प्रतीक को सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है.

आज हम भारत के राष्ट्रीय झंडे को जिस तरह से देख रहे हैं, शुरुआत में यह ऐसा नहीं था. यह जानना बहुत ही दिलचस्प होगा कि कैसे हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने पहले प्रारूप से कई बदलावों का रास्ता इख्तियार करते हुए अपने वर्तमान स्वरूप में आया है. इसकी शुरुआत हमारे राष्ट्रीय संघर्ष के दौरान के दौरान हुई थी. भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का जो स्वरूप आज है वह झंडे के विकास की एक लंबी कड़ी के कई पहलुओं से गुजर कर संभव हो पाया. हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विकास में कुछ ऐतिहासिक मील के पत्थर हैं जिन्होंने अलग-अलग झंडे को अलग-अलग रंग और पहचान दी.

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