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महिला सिपाही की मौत के बाद आग बबूला हुए,,पुलिस लाइन के सिपाही, कई पुलिस पदाधिकारी सहित पत्रकारों के साथ की मारपीट, कैमरा तोड़ा

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शुक्रवार को पटना में महिला सिपाही की मौत से जो बवाल हुआ उससे पूरे सरकार की साख मिट्टी मिल गयी। स्वास्थ्य विभाग की बेपरवाही की कीमत सरकार की चुकानी पड़ी।

सहयोगी की मौत के बाद विद्रोह पर उतरे सिपाही

बुधवार की रात डेंगू की वजह से सहरसा के एसडीओ सृष्टि राज सिन्हा की पटना के एक निजी अस्पताल में मौत हो गयी। राजधानी पटना में डेंगू से किसी अफसर की यह चौथी मौत थी। इसके पहले दो डॉक्टरों और एक डीपीओ की मौत इस बीमारी से हो चुकी है। शुक्रवार की सुबह महिला सिपाही की मौत हो गयी। महिला सिपाही की मौत के बाद सिपाहियों ने जिस तरह पुलिस के बड़े – बड़े अफसरों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, वह भयावह और दुखद था। आखिर ऐसा नौबत क्यों आयी

डेंगू से मौत को झुठलाने में लगा है स्वास्थ्य विभाग

सहरसा के एसडीओ सृष्टिराज सिन्हा की मौत डेंगू से हुई। उनके परिजन भी कह रहे हैं उनकी मौत डेंगू से हुई है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग यह साबित करने में लगा है कि अधिकारी की मौत डेंगू से नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी की रोकथाम में ताकत लगाने की बजाय वह तर्कों के जाल में उलझा है। पटना के अस्पताल डेंगू के मरीज से भरे पड़े हैं। उनके भर्ती के करने के लिए जगह नहीं है। अब तक डेंगू से पीड़ित 809 मरीजों की पहचान हो चुकी है। यह संख्या अभी और बेढ़ेगी क्यों कि बीमारी तेजी से पांव पसार रही है।

पिछले डेढ़ महीने से बिहार में डेंगू का प्रकोप है। इसकी रोकथान के लिए किये जा रहे सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस मामले में युद्धस्तर पर कोशिश होनी चाहिए थी। इस भयावह स्थिति में केन्द्र सरकार से मदद लेनी चाहिए थी। दिल्ली से विशेषज्ञों के बुलाया जाना चाहिए था। लेकिन हालत ये ही की गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में फॉगिंग भी नहीं हो रही। इस विकट स्थिति में स्वास्थ्य मंत्री नीदरलैंड की यात्रा पर चले गये थे। पटना का कंकड़बाग इलाक अभी इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित है। कुम्हरार के विधायक अरुण सिन्हा फिलहाल मॉरीशस की यात्रा पर हैं। लोगों की जान बचाने के लिए अभी सरकार के पूरे तंत्र को लगना होगा।

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