
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा खागा क्षेत्र अयोध्या वाटिका में चल रही तीन दिवसीय श्री हरि कथा के समापन दिवस पर कथा वाचक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी श्री शिवशरणानंद जी ने बताया कि गुरु का महत्व जीवन में क्या है और गुरु मनुष्य के जीवन में आते हैं तो उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है स्वामी जी ने बताया परमात्मा कण-कण में व्याप्त हैं लेकिन उसका साक्षात्कार पूर्ण सतगुरु की कृपा से संभव है, ईश्वर के दर्शन करने के बाद जीव ध्यान, साधना करके अपने जीवन को सुख और समृद्धि शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर सकता है ।
श्रीमद् भागवत गीता में भगवान श्री कृष्णा अर्जुन को समझते हैं –
“तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः॥” (भगवद्गीता 4.34)
अर्थात विनम्रता, सेवा और श्रद्धा से गुरु के पास जाकर ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। तत्त्वदर्शी गुरु ही वास्तविक ज्ञान प्रदान करते हैं।
धर्म, भक्ति और आत्मज्ञान का मार्ग गुरु के शरण में जाकर ही मनुष्य को मिलता हैं
अच्छे और बुरे का विवेक प्राप्त होता हैं | मन, बुद्धि और चित्त को निर्मल गुरु कृपा से किया जाता हैं । गुरु-भक्ति केवल व्यक्ति-पूजा नहीं, बल्कि ज्ञान, सत्य और सदाचार के प्रति समर्पण है। शिष्य जितनी श्रद्धा और सेवा से गुरु के उपदेशों का पालन करता है, उतनी ही उसके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है।
अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं, गुरुदेव निराशा से आशा की ओर ले जाते है,भय से निर्भयता की ओर ले जाते है,अहंकार से विनम्रता की ओर ले जाते है।
सांसारिक भ्रम से आत्मिक शांति की ओर ले जाते है।
जीवन का उद्देश्य समझाते है।
ईश्वर-भक्ति और आत्मसाक्षात्कार का मार्ग दिखाते है।गुरु के बिना ज्ञान कठिनशास्त्रों में कहा गया है कि जैसे बिना दीपक के अंधेरे में मार्ग नहीं मिलता, वैसे ही सद्गुरु के मार्गदर्शन के बिना आध्यात्मिक यात्रा अत्यंत कठिन हो जाती है। गुरु शिष्य के भीतर छिपी दिव्य संभावनाओं को जागृत करते हैं। स्वामी जी कथा में बताते है
गुरु-भक्ति के लाभ
मन की शांति और स्थिरता।
आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि।सदाचार, संयम और करुणा का विकास।परिवार और समाज में सकारात्मक प्रभाव।
आध्यात्मिक उन्नति एवं ईश्वर के प्रति प्रेम की वृद्धि।
गुरु हमें नया जीवन नहीं देते, बल्कि जीवन को सही ढंग से जीने की कला सिखाते हैं।
“गुरु कृपा ही केवलम्, शिष्य जीवन का परम बल है।
गुरु ज्ञान ही वह दीप है जो जीवन के अंधकार को दूर कर आत्मा को परमात्मा से जोड़ देता है।”
कार्यक्रम का समापन संचालन संस्थान के संयोजक स्वामी विश्वनाथानंद जी ने किया और
कथा उपरांत भक्तों के लिए भंडारे प्रसाद की भी व्यवस्था किया गया था | इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलित करने हेतु अतिथि श्री प्रकाश पाण्डेय ( रामलीला कमेटी अध्यक्ष),श्री रितेश पांडेय (अध्यक्ष प्रेस क्लब),श्री रवि कुमार पाण्डेय ( बजरंग दल अध्यक्ष), श्री अभिषेक भार्गव (उप डाक निरीक्षक),श्री राजू दुबे, श्री संतोष मिश्रा,श्री राजू द्विवेदी, श्री जगदीश सिंह (झब्बु सिंह), श्री अनुराग द्विवेदी,श्री अविनाशचन्द्र द्विवेदी, श्री पप्पू द्विवेदी, श्री राजेंद्र बाजपाई (अशोक मोटर्स खागा, श्री अशोक तिवारी, श्री दुर्गेश द्विवेदी, श्री पप्पू तिवार की गरिमामय उपस्थिति रही |


