जनपद बांदा।
बांदा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमासिन में कार्यरत आशा वर्कर सहित आशा संगिनी ने राजकीय कर्मचारी घोषित कर मानदेय बढ़ाने की प्रमुख मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करते हुए 2000 के मानदेय में दम नहीं 24000 से कम नहीं के नारेबाजी करते हुए मांग पूरी न होने तक कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। आशा संगिनी गुड़िया यादव नरायनपुर ने मीडिया को बताया कि संगनी को प्रतिमाह 7500 प्रोत्साहन राशि मिलने से सभी संगिनी परेशान है। वहीं आशाओं को प्रतिदिन 75 रुपए की दर से प्रोत्साहन राशि मिलने पर घर गृहस्थी इस महंगाई में चलाना मुश्किल हो रहा है यह भी कहा कि हम इतने कम मानदेय में कार्य नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने आज तक हमारा मानदेय नहीं बढ़ाया और यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी अखिलेश की सरकार होती तो हमारा मानदेय बढ़ जाता। सरकार पर आरोप लगाए हुए बताया गया कि जब से भाजपा सरकार आई है हम परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं।

माया देवी आशा वर्कर मुसीवा ने बताया कि हमारी मांग है कि 24 घंटे कार्य करने का प्रतिदिन 75 रुपए सरकार से मिलता है सरकार ने हमारे बारे में कुछ नहीं सोचा। गर्भवती माता का टीकाकरण सहित प्रसव कार्य, घर-घर भ्रमण, आयुष्मान कार्ड, संचारी रोग व स्वास्थ्य सेवा का कार्य करके 75 रुपए प्रतिदिन में हमारा गुजारा नहीं हो रहा है 24000 रुपए मासिक मानदेय किया जाए और अस्पताल में एक विश्राम कक्ष भी आशाओं की सुविधा के लिए उपलब्ध कराया जाए। बताया गया कि हमलोग 24 घंटे अथक परिश्रम करती हैं लेकिन मानदेय नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि अगर हमारा मानदेय नहीं बढ़ाया तो हम सरकार को बदलने का कार्य करेंगे। आशा, संध्या देवी राघोपुर ने बताया कि चार-पांच माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, बजट आने पर भुगतान करने को कहा जा रहा है। आशाओं और आशा संगिनीयों के धरना प्रदर्शन को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉक्टर दिनेश राजपूत ने बताया की आशाओं ने कार्य बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। उनके प्रमुख मांग राजकीय कर्मी घोषित करने, मानदेय में बढ़ोतरी करने, आशाओ के दुर्घटना से मृत्यु होने पर परिवार को 10 लाख की आर्थिक सहायता की मांग की गई है। कार्य बहिष्कार पर अधीक्षक ने कहा स्वास्थ्य केंद्र के स्थाई कर्मियों से राष्ट्रीय कार्यक्रम को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। आशाओं के मानदेय कटौती के बारे में अधीक्षक ने बताया कि आशाओं द्वारा जो फर्जी हस्ताक्षर कर प्रपत्र जमा किए जाते हैं सत्यापन ना हो पाने पर मानदेय की कटौती होती है। आशा संगिनी और आशाओं द्वारा दिए गए मांग पत्र को शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही हेतु भेज दिया गया है।
Crime 24 Hours / ब्यूरो रिपोर्ट


