भाजपा मंडल अध्यक्ष की तहरीर पर हथगाम थाने में मुकदमा दर्ज, सोशल मीडिया पोस्ट की जांच शुरू
पुलिस जुटी डिजिटल साक्ष्य खंगालने में, सुरक्षा और साइबर एंगल से भी हो रही पड़ताल
फतेहपुर ::- फतेहपुर जनपद में सोशल मीडिया पर कथित रूप से पूर्व विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्य मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भइया के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। शिकायत के आधार पर हथगाम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट की सत्यता और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी हथगाम मंडल अध्यक्ष गणेशीलाल साहू ने थाना हथगाम में शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि फेसबुक आईडी “Dharm veer singh” से पूर्व मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह के विरुद्ध कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं तथा उन्हें गोली मारकर हत्या करने वाले को 50 लाख रुपये नकद, एक फॉर्च्यूनर वाहन और 10 बीघा जमीन देने की घोषणा की गई। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर आपराधिक कृत्य बताते हुए पूर्व मंत्री की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से न केवल जान से मारने की धमकी दी गई, बल्कि सार्वजनिक मंच पर अभद्र भाषा का प्रयोग कर उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। प्रार्थना पत्र में मामले की निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और संबंधित फेसबुक अकाउंट, पोस्ट तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कराया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर साइबर विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि पोस्ट किसने, कब और किन परिस्थितियों में साझा की।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देना, हिंसा के लिए उकसाना या इनाम घोषित करने जैसे आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही होगी।
खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसलिए इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायत और दर्ज प्रकरण के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। जांच पूरी होने और पुलिस के आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।
लोकतंत्र में मतभेद व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध हिंसा के लिए उकसाना, जान से मारने की धमकी देना या सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक एवं भड़काऊ सामग्री प्रसारित करना कानूनन अपराध हो सकता है। सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी और संवैधानिक मर्यादा के साथ करें। प्रशासन से अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करे।
जनहित सुझाव
सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की धमकी या भड़काऊ पोस्ट साझा न करें।
किसी भी संदिग्ध या आपराधिक पोस्ट की सूचना तत्काल पुलिस अथवा साइबर सेल को दें।
अपुष्ट सूचनाओं को वायरल करने से बचें।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कानूनी जिम्मेदारियों का भी पालन करें।


