विश्व पर्यावरण दिवस पर सवाल: क्या सिर्फ एक दिन की तस्वीरों से बचेगा बुंदेलखंड और बाँदा का पर्यावरण: शालिनी

जनपद बांदा।

जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक कटाक्ष करते हुए कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को बहुत से लोग पेड़ लगाएंगे, फोटो खिंचवाएंगे, सोशल मीडिया पर पोस्ट डालेंगे और अखबारों की सुर्खियां बनेंगे।लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल 5 जून को पौधा लगाकर तस्वीरें खिंचवा लेने से पर्यावरण की रक्षा हो जाएगी? देश के सबसे गर्म जिलों में गिने जाने वाले बाँदा की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। यहां भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं, जलस्रोत सूख रहे हैं, पेयजल के लिए गांव-गांव में संघर्ष हो रहा है, लोग सड़क जाम करने को मजबूर हैं और बुंदेलखंड का पर्यावरण लगातार संकट में पड़ता जा रहा है। दुखद बात यह है कि आज जो लोग पर्यावरण संरक्षण के नाम पर फोटो खिंचवा रहे हैं, उन्हीं में से कई लोग साल भर नदियों का सीना छलनी करने वाले अवैध खनन, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर मौन रहते हैं या उसका हिस्सा बन जाते हैं। यदि वास्तव में पर्यावरण बचाना है तो केवल एक दिन का दिखावा नहीं, बल्कि पूरे वर्ष ईमानदारी से प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेना होगा। नदियों को बचाना होगा, अवैध खनन पर रोक लगानी होगी, भूजल संरक्षण करना होगा और लगाए गए पौधों की देखभाल भी करनी होगी। पर्यावरण दिवस केवल औपचारिकता या फोटो सेशन का विषय नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का दिन है कि हमने प्रकृति से कितना लिया और उसे वापस क्या दिया। साल भर नदियों को खोखला करना, बुंदेलखंड की धरती को छलनी करना, हजारों पेड़ों को कटवाना और फिर एक दिन पौधा लगाकर पर्यावरण प्रेमी बनने का दिखावा करना किसी भी तरह से पर्यावरण संरक्षण नहीं कहलाएगा। प्रकृति को बचाने के लिए दिखावे नहीं, बल्कि निरंतर और ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता है।

Crime 24 Hours / ब्यूरो रिपोर्ट