एंटी करप्शन टीम की कार्यवाही पर भी उठे सवाल जब मुख्य सरगना का नाम आया सामने तो क्यों नहीं दर्ज हुआ मुकदमा

डीएम मैडम फतेहपुर आपके खागा रजिस्ट्री में रिश्वत का पर्दाफाश, लेकिन “मुख्य सरगना ” कहां?

1 लाख लेते बाबू गिरफ्तार, लेकिन 70% हिस्सा ऊपर जाता था” का खुलासा अभी भी सवालों के घेरे में.

रिश्वत का सिंडिकेट” बेनकाब -रजिस्ट्रार समेत पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में

फतेहपुर खागा ::- सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सालों से चल रहे रिश्वत के साम्राज्य पर आखिरकार एंटी करप्शन का हथौड़ा गिरा। सोमवार को 13 सदस्यीय टीम ने छापा मारकर कनिष्ठ सहायक राहुल कुमार बौद्ध को 1 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
लेकिन गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है – जिस “साहब” के लिए वसूली होती थी, वो अब तक कार्रवाई की जद से बाहर क्यों है?.
“70% ऊपर जाता था” – बाबू के बयान से मचा हड़कंप
एंटी करप्शन की कड़ाई में राहुल ने जो बताया उसने पूरे विभाग में भूचाल ला दिया.
सूत्रों के अनुसार राहुल ने पूछताछ में कहा कि खागा रजिस्ट्री में हर अवैध वसूली का 70% हिस्सा “बड़े साहब” तक पहुंचता था। बाकी 30% में स्टाफ बंटवारा करता था।
स्थानीय लोगों और फरियादियों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से खागा रजिस्ट्री लूट का अड्डा बन चुकी थी। बिना पैसे के न बैनामा, न दाखिल-खारिज। लोगों का कहना है कि इस खेल से *करोड़ों की अवैध वसूली की गई है.
शिकायत से लेकर ट्रैप तक – पूरी कहानी.
यह पूरा मामला भीम सिंह पुत्र स्व. वैजनाथ सिंह, निवासी संग्रामपुर सानी की हिम्मत से खुला।
भीम सिंह ने 8 अगस्त 2026 को एंटी करप्शन थाना प्रयागराज में शिकायत दी थी। आरोप था कि 17 जून 2026 के बैनामे में झूठे तथ्य दिखाकर मुकदमे की धमकी देकर 1 लाख की रिश्वत मांगी जा रही है.

शिकायत पर एंटी करप्शन ने जाल बिछाया। सोमवार को जैसे ही राहुल ने रिश्वत की रकम ली, उसे लोकसेवक साक्षियों के सामने गिरफ्तार कर लिया गया.
शिकायतकर्ता भीम सिंह ने अपने बयान में रजिस्ट्रार उर्वरा शक्ति पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

कार्रवाई के बाद सन्नाटा, लेकिन असली मछली फरार.
राहुल की गिरफ्तारी के बाद खागा रजिस्ट्री कार्यालय में काम ठप है। कर्मचारी सहमे हुए हैं।
वहीं जिस अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा उछल रहा है, वो मौके से गायब है.
एंटी करप्शन टीम ने कहा है कि राहुल को जेल भेजने और मामले की गहन जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ में “अधिकारी के लिए वसूली” का जिक्र सामने आया है.

जिलाधिकारी फतेहपुर बताएं.
क्या सिर्फ मोहरा गिरफ्तार तक ही सीमित रह गई एंटी करप्शन टीम.
.क्या उस “बड़े साहब” पर 120B और भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज होगा जिसके इशारे पर ये पूरा खेल चलता था?
राजनीतिक संरक्षण या सिस्टम की मिलीभगत.
क्या इतने बड़े रैकेट को बिना ऊपर के आशीर्वाद के चलाया जा सकता था?
यूपी मुख्यमंत्री कब लेंगे संज्ञान.
खागा रजिस्ट्री को भ्रष्टाचार का अड्डा बनने से बचाने के लिए अब जिला प्रशासन क्या ठोस कदम उठाएगा?

खागा की जनता अब सिर्फ बाबू की गिरफ्तारी से संतुष्ट नहीं है। जब तक “सरगना” सलाखों के पीछे नहीं जाता, तब तक ये लड़ाई अधूरी है.