बाढ़ एवं अतिवृष्टि से उत्पन्न परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए डीएम ने दिए व्यापक दिशा-निर्देश

जनपद बांदा।

बांदा जनपद में बाढ़ एवं अतिवृष्टि से उत्पन्न परिस्थितियों, जलभराव तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की समीक्षा हेतु जिलाधिकारी बांदा अमित आसेरी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक संपन्न हुई। बैठक में जनहानि, पशुहानि, मकान एवं फसल क्षति, जलभराव, स्वच्छता, पीए सिस्टम, विद्युत आपूर्ति, क्षतिग्रस्त सड़कों, चिकित्सा सेवाओं तथा पशुओं के टीकाकरण सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की विभागवार समीक्षा की गई। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा संबंधित विभागों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

प्रमुख निर्देश:

फसल क्षति का एरिया-वाइज सर्वे: उपनिदेशक कृषि से फसलों को हुए नुकसान की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि अतिवृष्टि से मुख्य रूप से तिल, उड़द एवं मूंग की फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने क्षेत्रवार सर्वे कराकर क्षति का विस्तृत विवरण तैयार करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि यदि वास्तव में नुकसान हुआ है और वास्तविक स्थिति का आकलन करते हुए कोई भी पात्र किसान मुआवजे से वंचित न रहने पाए।

जलभराव वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन:

सभी उप जिलाधिकारियों को अपनी-अपनी तहसीलों के बड़े गांवों एवं जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नालों पर अतिक्रमण एवं जलभराव के प्रमुख कारणों को चिन्हित करते हुए चोक प्वाइंट्स की सूची तैयार करने को कहा गया।

पीए सिस्टम सक्रिय रखें: संवेदनशील एवं प्रभावित क्षेत्रों में लगे सभी पब्लिक एड्रेस सिस्टम (पीए सिस्टम) को सक्रिय रखने तथा आवश्यकता के अनुसार इनके माध्यम से लोगों को लगातार आवश्यक सूचनाएं एवं सावधानियां प्रसारित करने के निर्देश दिए गए।

विद्युत व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश:

अधिशासी अभियंता विद्युत को निर्देशित किया गया कि जहां-जहां पीए सिस्टम स्थापित हैं, वहां निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जनपद में विद्युत पोल एवं विद्युत व्यवस्था से संबंधित क्षतियों का सर्वे कराकर आवश्यक मरम्मत/दुरुस्तीकरण कार्य तत्काल कराया जाए।

क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत:

लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया कि अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त एवं गड्ढायुक्त सड़कों का तत्काल चिन्हांकन कर शीघ्र पैचवर्क एवं आवश्यक मरम्मत कार्य कराया जाए। सभी उप जिलाधिकारियों से अपनी-अपनी तहसीलों में खराब सड़कों की सूची शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता:

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी सीएचसी एवं पीएचसी में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। पोस्टमार्टम की कार्यवाही समय से संपादित कराने तथा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सतत उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

दूषित पेयजल से बचाव:

जलभराव वाले क्षेत्रों में जिन हैंडपंपों के ऊपर पानी आ गया है, उनके पानी का पेयजल के रूप में प्रयोग न करने के लिए लोगों को जागरूक करने तथा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

गौशालाओं में प्राथमिकता पर टीकाकरण:

पशुपालन विभाग को सभी गौशालाओं में पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। कीचड़ एवं जलभराव से प्रभावित गौशालाओं की सूची तैयार कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

गौशालाओं का स्थलीय निरीक्षण:

जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों एवं जिला विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि लेखपालों एवं ग्राम पंचायत सचिवों के माध्यम से गौशालाओं का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए तथा वहां की स्थिति की रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।

राहत व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी:

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जलभराव, स्वच्छता, विद्युत, चिकित्सा, पशु चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सेवाओं की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता से कार्य करें तथा प्रभावित लोगों को समय से आवश्यक सहायता एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। बैठक में आपदा प्रभारी/ अपर जिलाधिकारी न्यायिक माया शंकर यादव सहित संबंधित अधिकारी गण उपस्थित रहे।

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