छोटे राज्यों से ही विकास संभव
। छोटे राज्यों के गठन को विकास, प्रशासनिक सुगमता और क्षेत्रीय संतुलन के लिए आवश्यक बताते हुए फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स द्वारा रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। धरने में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के लिए पृथक राज्य के गठन की मांग उठाई।
धरने को संबोधित करते हुए बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुन्देलखण्ड लंबे समय से जल संकट, बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बड़े राज्य के एक हिस्से के रूप में बुन्देलखण्ड की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि बुन्देलखण्ड की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए पृथक बुन्देलखण्ड राज्य का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि छोटा राज्य होने से प्रशासन जनता के करीब पहुंचेगा, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और क्षेत्र के विकास के लिए अलग बजट एवं योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स के महामंत्री कमलेश झा ने मिथिला प्रदेश की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि मिथिला की अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान है। क्षेत्र के विकास के लिए पृथक मिथिला प्रदेश आवश्यक है।
पंकज पटेल ने आदिवासी प्रदेश की आवश्यकता पर विचार रखते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं और संसाधनों के अनुरूप अलग प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि वहां के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
वहीं पश्चिमी क्षेत्र से आए सुधीर चौधरी ने पश्चिम प्रदेश के गठन की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी क्षेत्र की आर्थिक क्षमता और जनसंख्या के अनुरूप अलग राज्य बनने से विकास की गति तेज हो सकती है।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि भारत में छोटे राज्यों के अनुभव बताते हैं कि सीमित भौगोलिक क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से नए राज्यों के गठन की मांग पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक तरीके से सम्मान देते हुए छोटे राज्यों के गठन की दिशा में सकारात्मक पहल की जानी चाहिए।


