जनपद बांदा।
भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व बांदा के ग्राम पंचायत मवई बुजुर्ग में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बड़े हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही गांव में त्योहार की रौनक देखने को मिली। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी गांव की महिलाओं तथा बहनों ने अपने सिर पर कजलिया रखकर गांव के प्राचीन गोसाई तालाब में जाकर कजरियों का विसर्जन किया तत्पश्चात वापस आकर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। भाइयों ने भी अपनी बहनों को आजीवन रक्षा का वचन देकर उपहार भेंट किए। घर-घर में मिठाइयाँ बंटी और बड़ों का आशीर्वाद लिया गया।
पौराणिक महत्व:
मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल के वध के लिए सुदर्शन चक्र चलाया तो उनकी उंगली में चोट लग गई। द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आँचल फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। इसी ऋण के फलस्वरूप श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई तभी से यह धागा रक्षा और विश्वास का प्रतीक बन गया। इस अवसर पर समस्त ग्रामवासियों ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
Crime 24 Hours / Mitesh Kumar


