लगातार बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, तिली-मूंग -उर्द की फसलें चौपट

रिपो-सुनील प्रजापति ऐंधा जालौन

खेतों में भरा पानी, फसलें जमीन पर बिछीं; किसानों ने मुआवजे की लगाई गुहार, बोले—पहले गेहूं का नुकसान भी नहीं मिला था मुआवजा

उरई (जालौन)। कई दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने और फसलों के लगातार भीगने से किसानों की मेहनत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। तहसील क्षेत्र उरई में तिली, मूंग और उर्दा समेत खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि बड़ी उम्मीद के साथ उन्होंने खेतों में फसल बोई थी, लेकिन लगातार बारिश ने तैयार होती फसल को चौपट कर दिया।
किसानों के मुताबिक बारिश के कारण कई खेतों में पानी जमा हो गया है। तिली की फसल को सबसे अधिक नुकसान बताया जा रहा है, जबकि मूंगऔर उर्दा की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। खेतों में खड़ी फसलें पानी और तेज बारिश के कारण गिर गई हैं। इससे किसानों के सामने लागत निकालने का संकट खड़ा हो गया है।

पहले गेहूं की मार, अब खरीफ की चिंता

किसानों का कहना है कि पिछली रबी की फसल के दौरान भी बारिश और मौसम की मार से गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा था। कई किसानों का दावा है कि नुकसान के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजे का लाभ नहीं मिल सका। ऐसे में इस बार खरीफ की फसल पर बारिश की मार ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।

किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च होती है। फसल खराब होने के बाद उनकी पूरी लागत डूबने का खतरा है। यदि समय रहते सर्वे कराकर क्षति का आकलन नहीं किया गया तो छोटे और सीमांत किसानों के सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग

क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश से प्रभावित गांवों में राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम भेजकर खेत-खेत फसल क्षति का सर्वे कराया जाए। किसानों का कहना है कि वास्तविक नुकसान के आधार पर पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए, ताकि अगली फसल की तैयारी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में राहत मिल सके।
लगातार बारिश ने एक बार फिर किसानों की उस चिंता को सामने ला दिया है कि एक तरफ मौसम की मार और दूसरी तरफ मुआवजे के इंतजार के बीच आखिर किसान अपनी मेहनत और लागत की भरपाई कैसे करे। अब किसानों की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं कि फसल क्षति का सर्वे कब शुरू होता है और उन्हें राहत कब तक मिलती है।