बाल विवाह, किशोर अपराधों व महिला सम्बन्धी अपराधों की प्रभावी रोकथाम हेतु मासिक समीक्षा बैठक में एएसपी ने दिए निर्देश

जनपद बांदा।

पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में मासिक एसजेपीयू एवं जनपदीय बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की बैठक को गुरुवार दिनांक 27 अगस्त 2026 अपर पुलिस अधीक्षक बांदा शिवराज की अध्यक्षता में पुलिस लाइन में विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) के तत्वाधान में बाल विवाह, किशोर अपराधों/हिंसा व महिला सम्बन्धी अपराधों आदि की प्रभावी रोकथाम के संबंध में मासिक समीक्षा बैठक की गई। इस दौरान गुमशुदा बच्चों को खोजने तथा उनकी सूचना समय से CCTNS एवं वात्सल्य पोर्टल में फीडबैक के साथ अपडेट किए जाने हेतु निर्देशित किया गया। बरामद बालिकाओं के नियमानुसार आंतरिक चिकित्सीय परीक्षण कराए जाने की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया एवं आने वाली समस्याओं का भी समाधान किया गया। महिला पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अपराध से पीड़ित होने की स्थिति में आवश्यकता अनुसार काउंसलिंग कराते हुए आंतरिक चिकित्सीय परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए। पीड़िता के धारा 180 BNSS के अंतर्गत बयान केवल महिला उपनिरीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा ही दर्ज किए जाएं।पीड़िता द्वारा दिए गए बयानों की पुष्टि कॉल रिकॉर्ड तथा परिजनों के बयानों से भी की जाए। पीड़िता जितने दिन बाहर रही, कहाँ-कहाँ रही, किसके साथ रही तथा उसके साथ क्या अपराध हुआ,इन सभी तथ्यों से संबंधित पर्याप्त एवं सुसंगत साक्ष्य संकलन किए जाने हेतु विवेचकों को निर्देशित किया गया। ऐसी बालिकाएं जो चार माह से अधिक समय से बरामद नहीं हुई हैं, उनके मामलों में उनके लैंगिक शोषण की संभावना मानते हुए विवेचना में एएचटीयू द्वारा कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही पीड़ित बच्चों की गोपनीयता बनाए रखते हुए उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत कर उनके संरक्षण, देखरेख एवं पुनर्वास को सुनिश्चित किये जाने हेतु भी निर्देशित किया गया। बैठक में देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (Children in Need of Care and Protection-CNCP) तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों (Children in Conflict with Law-CCL) के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि यदि कोई नाबालिग बच्चा किसी अपराध में संलिप्त पाया जाता है, तो गंभीर अपराधों को छोड़कर, ऐसे अपराध जिनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष से कम है, उनमें बच्चे के विरुद्ध सीएस की कार्यवाही नहीं की जाएगी। यदि कोई बच्चा बार-बार किसी भी प्रकार के अपराध में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके पुनर्वास, सुधार एवं उचित संरक्षण हेतु बाल संरक्षण विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बैठक के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) कार्यालय के प्रतिनिधि, जिला विद्यालय निरीक्षक, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), चाइल्डलाइन, आशा ज्योति केंद्र, विधि-सह-परिवीक्षा अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू), ग्रामीण स्वावलंबन समिति, ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान, साथी संस्था, गुमशुदा सेल आदि विभागों एवं संस्थाओं के अधिकारी/प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Crime 24 Hours / ब्यूरो रिपोर्ट