खागा फतेहपुर ::-
खागा नगर में आज ट्रक से हुई दर्दनाक घटना को मैं एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुई हत्या मानता हूँ। यह घटना फिर साबित करती है कि हमारे सिस्टम में गरीब की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है।
केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार और नगर प्रशासन—तीनों स्तरों पर सरकार होते हुए भी यदि ओवरलोड वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, यदि नगर के फूटपाथों पर सब्ज़ी व अन्य दुकानों का अव्यवस्थित कब्ज़ा बना हुआ है, और यदि नगर में सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक लागू नो-एंट्री का नियम काग़ज़ों से बाहर नहीं निकल पा रहा, तो इसकी सीधी ज़िम्मेदारी प्रशासन की है।
खागा नगर में भारी वाहनों की आवाजाही, संकरी सड़कों, अतिक्रमण और ट्रैफिक नियमों की खुलेआम अवहेलना के कारण आम नागरिक हर दिन मौत के साए में जीने को मजबूर है। आज जो हुआ, वह कल किसी और के साथ भी हो सकता है।
मैं स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ कि
जब नियम बनते हैं लेकिन लागू नहीं होते,
जब चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती,
और जब गरीब मरता है और फाइलें चलती हैं—
तो यह व्यवस्था की असफलता नहीं, अपराध है।
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति मांग करती है कि
ओवरलोड वाहनों पर तत्काल सख़्त कार्रवाई हो
नगर में फूटपाथ अतिक्रमण को व्यवस्थित/हटाया जाए
नो-एंट्री नियम को सख़्ती से लागू किया जाए
इस घटना के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवज़ा दिया जाए
यदि अब भी प्रशासन नहीं चेता, तो जनता को सड़कों पर उतरकर जवाब माँगना पड़ेगा।
— प्रवीण पाण्डेय
अध्यक्ष
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति
ब्यूरो रिपोर्ट



