बनारस की तर्ज पर बांदा में पहली बार माँ केन की महाआरती, भूरागढ़ घाट दीपों की रोशनी से जगमगाया

जनपद बांदा।

मंगलवार 22 सितंबर 2026 की शाम ऐतिहासिक भूरागढ़ किले के केन आरती स्थल घाट पर एक नया इतिहास रचा गया। बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर पहली बार माँ केन की भव्य महाआरती का दिव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शाम 6 बजे जैसे ही शंखनाद हुआ, 51 दीपों से माँ केन की आरती शुरू हुई। ढोल-नगाड़े, घंटियों और हर-हर गंगे, जय माँ केन के जयघोष से पूरा घाट गूंज उठा। केन नदी का किनारा ऐसा लग रहा था मानो साक्षात वाराणसी का दृश्य बांदा में उतर आया हो।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण सिंह और विशिष्ट अतिथि के रूप में बांदा वन विभाग के डीएफओ पंकज कुमार शुक्ला उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने विधि-विधान से माँ केन का पूजन कर आरती का शुभारंभ किया।

मुख्य अतिथि प्रवीण सिंह ने कहा कि “बांदा में इस तरह की महाआरती की शुरुआत एक सराहनीय और ऐतिहासिक पहल है। इससे हमारी युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ेगी और भूरागढ़ एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। विशिष्ट अतिथि डीएफओ पंकज कुमार शुक्ला ने कहा कि केन नदी बुंदेलखंड की जीवनरेखा है। इस प्रकार के धार्मिक आयोजन से लोगों में नदी के प्रति आस्था के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ेगी।

इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक महेश कुमार प्रजापति ने कहा कि आज का दिन बांदा के इतिहास में लिखा जाएगा। वर्षों से हमारा सपना था कि जैसे बनारस में गंगा आरती होती है, वैसे ही बांदा में भी केन मैया की आरती हो। आज वह सपना पूरा हुआ। केन केवल नदी नहीं, हमारी माँ है। हमारा उद्देश्य इस आरती के माध्यम से लोगों को केन नदी से जोड़ना और उसे स्वच्छ व अविरल बनाए रखना है। मैं सभी बांदा वासियों से अपील करता हूं कि हर मंगलवार शाम को अधिक से अधिक संख्या में आकर इस महाआरती में शामिल हों और पुण्य के भागी बनें। जिलाध्यक्ष महेश प्रजापति ने मुख्य अतिथि प्रवीण सिंह और डीएफओ साहब का हृदय से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और केन नदी को निर्मल बनाए रखने का संकल्प दिलाया गया।

Crime 24 Hours / Mitesh Kumar