जनपद बांदा।
बांदा में पर्युषण पर्व के छठवें दिन मंगलवार को जैन समाज ने उत्तम तप धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आराधना की। छोटी बाजार स्थित जैन चैत्यालय में बाल ब्रह्मचारी पंडित नन्हें भैया ने प्रवचन देते हुए उत्तम तप धर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और कर्मों की निर्जरा का महत्वपूर्ण माध्यम है। तप मनुष्य को अपनी इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सिखाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में संयम और तप को अपनाकर मनुष्य क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों से दूर हो सकता है। बाहरी तप के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता भी जरूरी है। तप का वास्तविक उद्देश्य आत्मा को विकारों से मुक्त कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।
आचार्य तारण स्वामी के ग्रंथों का किया पाठ:
धार्मिक आयोजन के दौरान जैन अनुयायियों ने आचार्य तारण स्वामी द्वारा रचित ग्रंथों का श्रद्धापूर्वक पाठ किया। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने और सत्य, अहिंसा, संयम तथा आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इसके बाद वेदी में विराजमान मां जिनवाणी की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए मां जिनवाणी की आरती उतारी। ढोल-मंजीरों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। पूरे चैत्यालय का वातावरण धार्मिक और भक्तिमय हो गया।
पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान के समापन के बाद मां जिनवाणी को सम्मान और श्रद्धाभाव के साथ पुनः वेदी जी में विराजमान कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में जैन समाज के महिला, पुरुष और बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Crime 24 Hours / Mitesh Kumar


