हम तो डूबे है सनम, तुमको भी ले डूबेंगे
खागा रिश्वत कांड में 70-30 बँटवारे का आरोप इसी कहावत से जुडी
फतेहपुर/खागा। उपनिबंधक कार्यालय खागा में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए कनिष्ठ सहायक निबंधक बाबू राहुल कुमार बौद्ध के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कोतवाली खागा में मुकदमा अपराध संख्या 6002/2026 दर्ज किया गया है। जिसमे शिकायतकर्ता भीम सिंह के साथ एंटीकरेप्शन इंस्पेक्टर अलाउद्दीन अंसारी मुकदमे के वादी हैं ।
रिश्वतखोरी के मामले में कुछ मीडिया खबरों में उपनिबंधक अधिकारी पर भी भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं और 70 प्रतिशत अधिकारी तथा 30 प्रतिशत स्टाफ में बांटे जाने का आरोप गिरफ्तार बाबू राहुल कुमार के हवाले से बताना कहकर ख़बर प्रसारित की जा रही है।
हालांकि उपलब्ध एफआईआर में 70-30 प्रतिशत हिस्सेदारी अथवा राहुल बाबू के किसी बयान का कोई उल्लेख नहीं है।
सोचनीय बिन्दु ये है कि यह 70-30 प्रतिशत वाली बात आखिर किस आधार पर सामने आई? यदि यह बात आरोपी बाबू के कथित बयान पर आधारित है तो पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रिश्वत लेते हुए जिस कर्मचारी की गिरफ्तारी हुई, उसी कर्मचारी की ओर से अब अपने अधिकारी पर भी कथित हिस्सेदारी का आरोप लगाया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या गिरफ्तारी के बाद अपनी भूमिका को हल्का करने के लिए कर्मचारी ने कथित अधिकारी का नाम लिया होगा या उसके पास अधिकारी के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य भी मौजूद हैं ?
महज किसी गिरफ्तार आरोपी के बयान से किसी अधिकारी की संलिप्तता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती। अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य, लेनदेन का रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान अथवा जांच में सामने आने वाली अन्य महत्वपूर्ण सामग्री के आधार पर कथित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उपनिबंधक अधिकारी के नाम पर खुला मीडिया ट्रायल सवालो के घेरे में है! वैसे घटना के दिन उपनिबंधक अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं थी बल्कि वो विभागीय मीटिंग में जनपद मुख्यालय गई थी। शायद उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर कथित रिश्वतखोरी की घटना को अंजाम दिया गया होगा।
चर्चा यह भी है कि मीडिया के एक वर्ग द्वारा इन कथित आरोपों को लगातार प्रमुखता दिए जाने से संबंधित अधिकारी पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश तो नहीं की जा रही? हालांकि यह भी महज एक आशंका है और इसकी पुष्टि के लिए ठोस तथ्य आवश्यक हैं।
एक लाख रुपये की कथित रिश्वत की बरामदगी और राहुल कुमार बौद्ध के खिलाफ दर्ज एफआईआर इस मामले के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा है, जबकि अधिकारी पर लगाए गए आरोपों और 70-30 प्रतिशत के दावे की मीडिया ट्रायल की पुष्टि जांच में सामने आने वाले स्वतंत्र साक्ष्यों से ही हो सकेगी।


