रेलवे लाइन बन सकती है बुंदेलखंड की लाइफलाइन : प्रवीण पांडेय

 

अतर्रा-बबेरू-फतेहपुर रेल परियोजना की पुरानी परिकल्पना को फिर जीवित करने की मांग, ऊंचाहार और सागर से जोड़ने पर जोर

फतेहपुर ::-  बुंदेलखंड को रेल नेटवर्क से जोड़ने की पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने अतर्रा-बबेरू होते हुए फतेहपुर को ऊंचाहार तथा आगे सागर से जोड़ने वाली रेल परियोजना पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि बेहतर रेल संपर्क बुंदेलखंड के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्थानीय ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, ब्रिटिश शासनकाल में फतेहपुर-अतर्रा-सागर रेल संपर्क की योजना पर सर्वे और प्रारंभिक तैयारियां की गई थीं। वर्ष 1913 में अतर्रा को जंक्शन के रूप में विकसित करने तथा सागर से फतेहपुर तक रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव रखा गया था। वर्ष 1917 में सर्वे के बाद राजापुर, कमासिन, बबेरू, बिसंडा, पुनाहुर, अतर्रा, नरैनी और करतल क्षेत्र में प्रस्तावित रेल मार्ग की निशानदेही किए जाने का उल्लेख मिलता है।

बताया जाता है कि वर्ष 1927 में रेल लाइन निर्माण का ठेका भी दिया गया था। अतर्रा क्षेत्र में निर्माण सामग्री और उपकरण रखे जाने तथा वर्ष 1936 में मिट्टी डालने का काम शुरू होने की बात भी सामने आती है। वर्ष 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू होने के बाद परियोजना का काम रुक गया और इसके बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

कई क्षेत्रों को मिल सकता है रेल संपर्क

प्रवीण पांडेय ने कहा कि रायबरेली-ऊंचाहार-खागा-फतेहपुर-अतर्रा-बांदा-सागर रेल संपर्क विकसित होने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान हो सकता है।

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के कई क्षेत्र अभी भी पर्याप्त रेल संपर्क से वंचित हैं। इसलिए बांदा-फतेहपुर, बांदा-कालिंजर-सतना जैसे प्रस्तावित रेल मार्गों के साथ अतर्रा-बबेरू-फतेहपुर रेल संपर्क की व्यवहार्यता पर भी अध्ययन कराया जाना चाहिए।

उन्होंने हमीरपुर मुख्यालय, राठ और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल कालिंजर को भी रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग की। उनके अनुसार रेल संपर्क बढ़ने से किसानों को बाजार, युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार तथा पर्यटन क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

पुरानी मांग को वर्तमान जरूरतों से जोड़ने की जरूरत

बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के संरक्षक तारा पाटकर ने कहा कि झांसी-मानिकपुर रेल मार्ग पुराना रेल संपर्क है, लेकिन क्षेत्र के अनेक हिस्सों को अभी भी बेहतर रेल नेटवर्क की आवश्यकता है। अतर्रा-फतेहपुर और महोबा-उरई सहित विभिन्न रेल परियोजनाओं की मांग समय-समय पर उठती रही है।

प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए सड़क और रेल दोनों स्तरों पर कनेक्टिविटी मजबूत करना जरूरी है। पुरानी रेल परियोजनाओं के उपलब्ध अभिलेखों और वर्तमान यातायात आवश्यकताओं का अध्ययन कर व्यवहारिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।