जनपद बांदा।
बांदा में पर्युषण पर्व के आठवें दिन बुधवार को जैन समाज द्वारा उत्तम त्याग धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। छोटी बाजार स्थित जैन चैत्यालय जी में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस दौरान धर्म ध्वजा फहराई गई और भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। धार्मिक प्रवचन में उत्तम त्याग धर्म की महिमा बताते हुए कहा गया कि त्याग का अर्थ केवल धन-संपत्ति छोड़ देना नहीं, बल्कि मन में बसे लोभ, मोह, अहंकार, राग-द्वेष और कषायों का त्याग करना भी है। मनुष्य जब अपनी इच्छाओं और आसक्तियों पर नियंत्रण करता है, तभी आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है। बताया गया कि भगवान महावीर स्वामी ने अपने जीवन में त्याग और संयम का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने राजसी वैभव और सांसारिक सुखों का त्याग कर आत्मकल्याण और सत्य की खोज का मार्ग अपनाया। इसी प्रकार जैन धर्म में अनेक संतों और श्रावकों ने अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर परोपकार, संयम और धर्म के मार्ग को अपनाने का संदेश दिया है। कार्यक्रम में कहा गया कि सच्चा त्याग वह है, जिसमें मनुष्य अपनी स्वार्थपूर्ण इच्छाओं को छोड़कर दूसरों के हित और आत्मिक उन्नति की ओर बढ़े। यदि प्रत्येक व्यक्ति लोभ, क्रोध और अहंकार का त्याग कर भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य और संयम के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारे तो समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और शांति का वातावरण बन सकता है।

इस अवसर पर चैत्यालय जी में मां जिनवाणी की भक्ति भाव से आरती की गई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और स्तुति के माध्यम से मां जिनवाणी की आराधना की। पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जैन समाज के लोगों ने भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने, जीवन से बुराइयों का त्याग करने तथा विश्व में अमन-चैन, सुख-शांति और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। धर्म ध्वजा फहराने का उद्देश्य भी भगवान महावीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और लोगों को धर्म, अहिंसा, संयम तथा त्याग के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना रहा।
Crime 24 Hours / Mitesh Kumar


