कृषि विश्वविद्यालय में मनाया गया गाजरघास जागरूकता सप्ताह

जनपद बांदा।

बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन शोध परियोजना के अंतर्गत 16 से 22 अगस्त 2026 तक गाजरघास जागरूकता सप्ताह मनाया गया। इस दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को गाजरघास के दुष्प्रभावों, पहचान, प्रबंधन एवं नियंत्रण के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर द्वारा तैयार की गई गाजरघास संबंधी जागरूकता फिल्म विद्यार्थियों को दिखाई गई। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. जी.एस. पंवार ने बताया कि गाजरघास (पार्थेनियम घास) जिसे कांग्रेस घास भी कहते हैं, एक अत्यंत आक्रामक एवं तेजी से फैलने वाला खरपतवार है, जो खेतों में फसलों के साथ फैल कर उनकी वृद्धि एवं उत्पादकता को प्रभावित करता है। इसके बीज बड़ी संख्या में बनते हैं और लंबे समय तक मिट्टी में जीवित रह सकते हैं, जिससे इसका प्रसार नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

गाजरघास का प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं है। इसके संपर्क में आने से संवेदनशील व्यक्तियों में त्वचा संबंधी एलर्जी, खुजली, एक्ज़िमा और डर्मेटाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके परागकण एवं पौधे के संपर्क से कुछ लोगों में श्वसन संबंधी एलर्जी और अस्थमा की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। पशुओं के स्वास्थ्य तथा चरागाहों की गुणवत्ता पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. दिनेश साह ने कहा कि विद्यार्थियों को गाजरघास के दुष्प्रभावों एवं इसके प्रभावी प्रबंधन की जानकारी देकर समाज में भी जागरूकता का प्रसार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गाजरघास के नियंत्रण के लिए समय रहते इसकी पहचान कर फूल एवं बीज बनने से पहले पौधों को उखाड़ना तथा सुरक्षित तरीके से नष्ट करना प्रभावी उपायों में शामिल है। इसके साथ ही यांत्रिक, सांस्कृतिक, जैविक एवं रासायनिक विधियों का समन्वित उपयोग किया जा सकता है।

इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. गुरुशरण पंवार ने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से गाजरघास के प्रभाव और प्रबंधन को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कृषि प्रक्षेत्र में स्नातक छात्रों के साथ स्वयं गाजरघास उखाड़कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। विश्वविद्यालय के कृषि प्रक्षेत्र, महाविद्यालय परिसर तथा छात्रावासों के आसपास स्नातक, परास्नातक एवं शोध छात्रों, एनएसएस स्वयंसेवकों, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा गाजरघास उन्मूलन अभियान चलाया गया। उखाड़ी गई गाजरघास को सुरक्षित रूप से मिट्टी में दबाकर नष्ट किया गया तथा इसके संबंध में जानकारी देने वाले पम्पलेट भी वितरित किए गए। जागरूकता सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों को गाजरघास की पहचान, मानव एवं पशु स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव, फसलों एवं पर्यावरण को होने वाली क्षति तथा इसके एकीकृत प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर को गाजरघास मुक्त रखने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में सस्यविज्ञान विभाग के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

Crime 24 Hours / ब्यूरो रिपोर्ट