शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 454 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न

 

फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 454 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां, वंदना, धर चरणों में शीश।
हमें देश से प्रेम का, देना शुभ आशीष।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- हिंदी भाषा का नहीं ,कोई और विकल्प।
निज भाषा उत्थान का, आओ लें संकल्प ।।

डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – इस मृत्युलोक का अटल नियम, परिवर्तन पर परिवर्तन है।
यदि परिवर्तन से विमुख व्यक्ति, जड़वत ही उसका जीवन है।।

राम अवतार गुप्ता ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- जय हो हिंदी दिवस की ,जय हो हिंदुस्तान।
हिंदी भाषा को मिले, सर्वश्रेष्ठ सम्मान।।

प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – उपमा नहीं उमा की कोई,शिव प्रति प्रेम महान की।
हरतालिका तीज व्रत गाथा, उनके तप- वरदान की।।

डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – देखत- देखत जग गया ,रहा न हरदम कोय।
जो आया इस विश्व में, निश्चय जाना होय।।

काव्य गोष्ठी के आयोजक तथा संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक मुक्तक के माध्यम से अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये- ब्रिक्स सम्मिलन में न हो ,केवल मेल – मिलाप।
रचे ठोस आधार भी,सार्थक वार्तालाप।। आगे पुनः पढ़ा -धरती मां की कष्ट में, सुनकर करुण कराह।
प्रकट हुए थे आज ही, श्रीहरि हो वाराह।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।