जनपद बांदा।
बांदा जनपद के कमासिन कस्बे में चल रही 15 दिवसीय श्रीरामलीला में मंगलवार को दोपहर 2 बजे से परशुराम-लक्ष्मण संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संवाद के दौरान लक्ष्मण और भगवान परशुराम के बीच हुए तीखे वाक्य-विनिमय ने माहौल को रोमांच से भर दिया।
रामलीला मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम द्वारा भगवान शिव का धनुष तोड़े जाने के बाद परशुराम क्रोधित होकर जनक दरबार में पहुंचते हैं। धनुष टूटने की बात सुनकर वे अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं। इस दौरान लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखे संवाद होते हैं। लक्ष्मण के ओजपूर्ण जवाब और परशुराम के क्रोध का कलाकारों ने शानदार अभिनय किया। परशुराम द्वारा धनुष का खंडन करने वाले को समाज से अलग करने के प्रश्न पर लखन लाल ने कहा यह धनु पर ममता केहि हेतु लक्ष्मण के प्रश्न के उत्तर पर परशुराम जी ने कहा ममता जब तक संसार में रहती है वासना बन जाती है जब यही ममता भगवान से हो तो उपासना बन जाती है धनुष भगवान शंकर का है लेकिन धनुष भगवान नहीं बन सकता भोले का धनुष उनके दास ने ही तोड़ा है ऐसा लखन लाल ने परशुराम से कहा यह भी बताया कि धनुष टूटने का विरोध केवल परशुराम ही क्यों कर रहे हैं धनुष तोड़ने वाले को तो सारा संसार जानता है और उनकी जय जयकार कर रहा है तब परशुराम ने कहा धनुष शंकर का मेरे गुरु का जो हमारी श्रद्धा का रूप है श्रद्धा से व्यक्ति जब शिवा की उपासना करता है तो वह भक्ति के समान है इस उत्तर पर लखनलाल ने कहा राम कथा के अधिकारी और एक पिता के वचन का अनुरागी मैं अविरल पथ का राही हूं बिना कर्म के कोई कार्य नहीं होने वाला मैं कर्मवीर हूं कर्मधारी पर ज्वालामुखी से निकले अंगारों को पान किया जब तक संघर्ष नहीं करें यहां कोई महान नहीं बन सकता जो राम का नहीं हुआ वह किसी का नहीं हो सकता।
इसके बाद श्रीराम विनम्रता से परशुराम को शांत करते हैं। श्रीराम के धैर्य और विनम्रता से प्रभावित होकर परशुराम को श्रीराम के वास्तविक स्वरूप का बोध होता है। इस प्रसंग ने दर्शकों को धर्म, विनम्रता और मर्यादा का संदेश दिया।
मंचन के दौरान परशुराम सर्वेश कुमार हमीरपुर और राम के रूप में आनन्द शुक्ला लखनलाल का अभिनय रजनीश शुक्ला हमीरपुर के संवाद, अभिनय और भाव-भंगिमा पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों ने देर शाम तक रामलीला का आनंद लिया संबाद के दौरान बारह कलाओं से युक्त मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अवतरित थे। वहीं चार कलाओं से अवतरित भगवान परशुराम ने जब शिव धनुष तोड़ने वाले राम से कहा यदि आप राम है तो यह शारंग धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा दें।
राम रामापति करधन लेहू,खैचत चाप मिटै संदेहू तभी परशुराम के द्वारा शारंग देते समय अपने आप प्रत्यंचा चढ जाने पर परशुराम जी को विस्मय हुआ। कि प्रभु श्रीराम को पूर्ण अवतार जानकर राघव को प्रणाम करते हुए विनती की और महेंद्रांचल पर्वत तपस्या हेतु प्रस्थान कर गए। दर्शको ने तालियां बजाकर हर्ष ध्वनि से जय श्रीराम के जयकारे लगाकर पुष्प वर्षा की।
Crime 24 Hours / ब्यूरो रिपोर्ट


