जनपद बांदा।
नवरात्रि के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने और निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज में डीजे एवं लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाने की मांग को लेकर जिला अधिवक्ता संघ बांदा ने आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल, बांदा को ज्ञापन सौंपा। संघ ने तेज ध्वनि से आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का हवाला देते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। ज्ञापन में जिला अधिवक्ता संघ ने अवगत कराया कि वर्तमान में नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं एवं देवी भक्तों द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा-अर्चना एवं आराधना की जा रही है। धार्मिक स्थलों और पंडालों में डीजे तथा लाउडस्पीकर का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन कई स्थानों पर निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज में इनके बजने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पदाधिकारियों ने कहा कि बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव जिला अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में कहा कि तेज आवाज और डीजे की तीव्र ध्वनि से घरों में रहने वाले बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा बीमार व्यक्तियों को विशेष रूप से परेशानी होती है। लगातार तेज ध्वनि के संपर्क में रहने से मानसिक तनाव, नींद में बाधा और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि की तीव्रता को नियंत्रित करना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ आम नागरिकों के स्वास्थ्य और शांति का भी ध्यान रखा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन कराने की मांग ज्ञापन में माननीय उच्चतम न्यायालय के In Re: Noise Pollution (V), (2005) 5 SCC 733 मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए न्यायालय द्वारा दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। जिला अधिवक्ता संघ ने मांग की कि डीजे संचालकों और लाउडस्पीकर का उपयोग करने वालों से ध्वनि संबंधी निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
जिला अधिवक्ता संघ ने आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल से अनुरोध किया कि मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित क्षेत्रों के उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) और तहसीलदारों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। इसके तहत निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने वालों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। संघ का कहना है कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण करना भी जरूरी है। प्रशासन द्वारा प्रभावी निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित किए जाने से आमजन को अनावश्यक शोर से राहत मिल सकती है तथा शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने में मदद मिलेगी।
Crime 24 Hours / ब्यूरो रिपोर्ट


