चूल्हे की आंच पर बुझ गया सुहाग: हथगाम में बारूदी प्रलय ने छीनी एक बेबस गृहिणी की सांसें, मलबे में दफन हुई गृहस्थी

चूल्हे की आंच पर बुझ गया सुहाग: हथगाम में बारूदी प्रलय ने छीनी एक बेबस गृहिणी की सांसें, मलबे में दफन हुई गृहस्थी

काम करते-करते काल के गाल में समा गई कल्याणी: एक भयावह धमाके ने चीर दी आशियाने की छाती, उजड़ गया भरा-पूरा संसार

पल भर में मातम में बदला गृहस्थ जीवन: अभागे रफी कुरैशी के आंगन में गिरी वज्रपात सी आफत, सन्नाटे में गूंज रही चीत्कार

मलबे के नीचे दम तोड़ती ममता और अरमान: हथगाम में वो मंजर देखकर कांप उठी रूह, आंसुओं से भीगी खंडहर बनी देहरी

काल बनकर फूटी कौन सी चिंगारी? अपनी ही चौखट पर बलि चढ़ी बेकस महिला, परिजनों के विलाप से दहला फतेहपुर

हाथों में अधूरा छूट गया काम, बिछड़ गई जीवनसंगिनी: बारूद और ईंटों के ढेर में तब्दील हुआ सुहाग, पत्थर दिल भी रो पड़े

चीख तक न निकल सकी गले से: एक दिल दहला देने वाले धमाके ने छीन ली ज़िंदगी की धूप, घर में पसरा असीम अंधकार

राख के ढेर में विलीन हुई जीवन की डोर: जिस आंगन को संवारा उसी की दीवारों में समा गई बेबस नारी, हर आंख हुई नम

संभलने का मौका तक न दिया नियति ने: धराशायी हुई छत और कुचल गई एक मासूम ज़िंदगी, असीम संताप में डूबा परिवार

क्रूर काल की विभीषिका में तबाह हुआ सुख-चैन: हथगाम की उस बदकिस्मत देहरी पर बिखरे पड़े हैं सिसकियों के निशान