थानों का भ्रष्टाचार रोकना साहसिक कदम...
फतेहपुर ::- फतेहपुर जिले में आम जनता को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। शासन के निर्देशों के बावजूद, जिले के बड़े अधिकारी कार्यालयों में उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन तहसील, विकास खंड और जिला मुख्यालय के अन्य अधिकारियों के दरवाजे अक्सर बंद रहते हैं। इससे न्याय की सुलभता प्रभावित हो रही है।
राजस्व संबंधी मामलों से कहीं अधिक पुलिस संबंधी मामलों के पीड़ित न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाते हैं। हालांकि, लंबे समय से पुलिस अधीक्षकों ने अपने आवास पर फरियादियों से मुलाकात नहीं की है। यह परंपरा क्यों शुरू हुई, इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है, लेकिन सरकार और अधिकारियों के ‘न्याय के लिए दरवाजे हमेशा खुले’ रहने के दावे खोखले साबित हुए हैं।
आम जनता के लिए न्याय के दरवाजे बंद रखने की इस परंपरा को तत्कालीन पुलिस अधीक्षकों धवल जायसवाल, उदय शंकर सिंह और अनूप कुमार सिंह ने भी जारी रखा। यह स्थिति सरकारी आदेशों की अवहेलना, नेताओं की बेबसी या आमजन का दुर्भाग्य मानी जा सकती है, क्योंकि पुलिस अधीक्षक आवास में लोगों से न मिलने की प्रथा को समाप्त नहीं किया जा सका। यहां तक कि सत्ताधारी भी कमांडर से मिलने के लिए तरसते रहे।
यह व्यवस्था जनविरोधी और सरकार विरोधी रही है, जिसे पूर्व कमांडर अनूप कुमार सिंह की मनमानी और आमजन के प्रति बेरुखी का परिणाम बताया गया। थानों में भ्रष्टाचार और पुलिस की मनमानी से पीड़ित आमजन को सुलभ न्याय नहीं मिल पा रहा था।
अब जिले की कमान नए पुलिस कप्तान अभिमन्यु मांगलिक संभालने जा रहे हैं। उनके सामने यह चुनौती है कि क्या वे बंद दरवाजों की इस पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाएंगे, या वास्तव में आमजन के लिए न्याय के दरवाजे एक बार फिर खुलेंगे और थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट



