ड्यूटी पर नाम, कुर्सी पर कोई और—वेतन जारी बिना ब्रेक*
मामला उछलते ही बढ़ी दफ्तर में हलचल, अचानक दिखने लगी हाज़िरी – सूत्र
कैमरों में सक्रिय मनोज, आशा कार्यकर्ताओं के बीच ‘बड़े बाबू’ के नाम से मशहूर
तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन कर्मचारी, एक ही भ्रष्ट पैटर्न
फतेहपुर। योगी सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के बीच जिले का चर्चित घोस्ट पोस्टिंग मामला अब और गहराता जा रहा है। सूत्रों से मिल रही जानकारी, उपस्थिति पंजिका और CCTV रिकॉर्ड ऐसे संकेत दे रहे हैं, जो विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। बताया जा रहा है कि असोथर और खागा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात बाबू लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाज़िर रहे, लेकिन इसके बावजूद उनका वेतन नियमित रूप से जारी होता रहा। जैसे ही यह मामला चर्चा में आया, संबंधित कर्मचारी अचानक कार्यालय में उपस्थित दिखाई देने लगे। स्थानीय स्तर पर इसे सीधे तौर पर “डैमेज कंट्रोल” की रणनीति बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि जिन पदों पर आधिकारिक तौर पर बाबू तैनात हैं, वहां वास्तविक कार्य मलेरिया विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मनोज द्वारा किया जाता रहा है। भुगतान प्रक्रिया हो, फाइलों की निस्तारण प्रक्रिया हो या दैनिक कार्यालयीन पत्राचार—ज्यादातर जिम्मेदारियां वही निभाते देखे गए। स्थिति यह बताई जा रही है कि विभाग से जुड़ी आशा बहुएं भी उन्हें ही “बड़े बाबू” कहकर संबोधित करती हैं।
चर्चा है कि हाल के दिनों की CCTV फुटेज में मनोज कार्यालयीन कार्य करते स्पष्ट दिखाई देंगे, जबकि नियुक्त बाबू मौके पर मौजूद नहीं मिलते। यदि यह रिकॉर्ड सार्वजनिक होता है, तो कई दावों की परतें खुल सकती हैं। इधर हंसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला भी सवालों के घेरे में है। यहां देवेंद्र प्रताप की नियुक्ति दर्ज है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनकी जगह CMO कार्यालय के अकाउंट विभाग से जुड़े विकास कार्य संभालते नजर आते हैं। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि जब नियुक्त कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थे, तो उनकी उपस्थिति किस आधार पर अंकित होती रही और वेतन किस प्रक्रिया के तहत जारी होता रहा? मामले को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत भेजे जाने की चर्चाएं तेज हैं। दस्तावेजों और रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षरों की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठ रही है। हाल ही में जिले के दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के संज्ञान में भी यह प्रकरण लाए जाने की बात कही जा रही है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि जांच की दिशा क्या होगी। क्या CCTV और दस्तावेजी साक्ष्य सिस्टम की सच्चाई सामने लाएंगे, या फिर जिम्मेदारों को बचाने के लिए कोई नया अध्याय लिखा जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट



