जंतर-मंतर पर गूंजा बुंदेलखंड, पृथक राज्य की मांग हुई बुलंद

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पृथक बुंदेलखंड हमारा अधिकार, दया नहीं’ — प्रवीण पांडेय

बुंदेलखंड की उपेक्षा पर फूटा आक्रोश, अब निर्णायक चरण में आंदोलन

राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन की मांग तेज

केंद्र से शीघ्र और समयबद्ध निर्णय की मांग

जंतर-मंतर पर छोटे राज्यों की हुंकार

फतेहपुर,
नए राज्यों के लिए महासंघ के बैनर तले नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर देशभर के प्रस्तावित राज्यों के समर्थकों ने धरना-प्रदर्शन किया।
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पृथक बुंदेलखंड राज्य जनता का अधिकार है, कोई दया नहीं। केंद्र सरकार को शीघ्र राज्य गठन की प्रक्रिया प्रारंभ करनी चाहिए।
बुंदेलखंड के वरिष्ठ आंदोलनकारी राजन धमेरिया ने कहा कि बुंदेलखंड लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं, किसानों और मजदूरों के भविष्य के लिए पृथक राज्य आवश्यक है।
पूर्वांचल के प्रतिनिधि पंकज झा ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश विकास की दौड़ में पीछे रहा है। पृथक पूर्वांचल राज्य बनने से स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से लंबित राज्य मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
राज्य पुनर्गठन आयोग गठित करने की मांग
कार्यक्रम में वक्ताओं ने केंद्र सरकार से राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन की मांग की। वरिष्ठ नेता श्री राम किशन सिंह तोमर (बाबा जी) ने कहा कि पूर्व में भी कई नेताओं ने छोटे राज्यों के गठन के लिए प्रयास किए थे और अब समय आ गया है कि इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जाए।
भारत को 50 राज्यों का संघ बनाने का प्रस्ताव
फेडरेशन के उपाध्यक्ष एवं उत्तरांध्र पार्टी के संस्थापक, सेवानिवृत्त आयकर सेवा अधिकारी श्री मेट्टा रामा राव गारू ने कहा कि देश के तीव्र और संतुलित विकास के लिए भारत को 50 राज्यों का संघ बनाया जाना चाहिए। उनका मत था कि छोटे राज्य बनने से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा।
पश्चिम प्रदेश, विदर्भ, मिथिला और आदिवासी प्रदेश की भी उठी मांग
पश्चिम प्रदेश निर्माण संयुक्त मोर्चा के केंद्रीय महासचिव कर्नल सुधीर चौधरी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 27 जिलों को मिलाकर पृथक पश्चिम प्रदेश बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जनसंख्या के कारण बड़े राज्यों का प्रभावी संचालन कठिन हो गया है।
विदर्भ राष्ट्र महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती रंजना ताई ममारडे ने कहा कि विदर्भ राज्य की मांग लगभग सौ वर्षों से की जा रही है और इस पर शीघ्र निर्णय होना चाहिए।
डॉ. पंकज पटेल ने आदिवासी प्रदेश के गठन की मांग उठाई, जबकि भारतीय महासंघ पार्टी के अध्यक्ष विनोद झा ने मिथिला राज्य के निर्माण की वकालत की।
पूर्व सांसद संसूमा खुंगुर ब्विस्वमुथियारी ने कहा कि बोडोलैंड सहित अन्य छोटे राज्यों के गठन से प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
धरना-प्रदर्शन के अंत में सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि संतुलित विकास, सुशासन और जनहित के लिए राज्यों के पुनर्गठन की दिशा में केंद्र सरकार को शीघ्र और ठोस कदम उठाने चाहिए।
कार्यक्रम में बुंदेलखंड, उत्तरांध्र, पश्चिम प्रदेश, मिथिला, रायलसीमा, कोंगुनाडु, तुलुनाडु, कोडावलैंड, कोंकण, विदर्भ, खानदेश, आदिवासी प्रदेश, सौराष्ट्र, मरुप्रदेश, जम्मू, लद्दाख, बघेलखंड, पूर्वांचल, कोसल प्रदेश, गोरखालैंड, कामतापुर, बोडोलैंड और टिपरालैंड सहित अनेक क्षेत्रों से सैकड़ों संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम का संचालन कमलेश झा ने किया

ब्यूरो रिपोर्ट