7 साल का करियर…41 एनकाउंटर, यह पहचान है यूपी पुलिस के 34 साल के IPS अफसर अभिमन्यु मांगलिक की

फतेहपुर ::-। अभिमन्यु के चक्रव्यूह में फंसे अपराधी पानी मांगते हुए सरेंडर कर देते हैं।

युवा सोच के साथ क्रिमिनल केस सॉल्व करने वाले अभिमन्यु कहते हैं- जिस दिन आप हार मान लेते हैं, उसी दिन से सफलता आप से दूर हो जाती है।

2018 बैच के IPS अभिमन्यु मांगलिक अभी भदोही के एसपी हैं। इससे पहले वह 26 महीने तक सहारनपुर में एसपी सिटी रहे। अभिमन्यु राज्यपाल के ADC भी रह चुके हैं। उनकी रिपोर्ट पर सहारनपुर में माफिया की जमीन खरीदने वाला इंस्पेक्टर बर्खास्त कर दिया गया।

वाराणसी में डेढ़ लाख के इनामी को ढेर करने वाले अभिमन्यु मांगलिक सीए की पढ़ाई कर चुके हैं। फिर उन्हें एक अच्छे पैकेज पर जॉब मिली। लेकिन, अभिमन्यु मांगलिक के कदम उन्हें खाकी वर्दी तक ले आए।

यूपी के बुलंदशहर में टीचर्स कॉलोनी है। यहां प्रमोद मांगलिक का घर है। वह पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट हैं। 2 फरवरी, 1991 को प्रमोद मांगलिक एक लड़के के पिता बने। पत्नी विभाग ने बेटे का नाम अभिमन्यु रखा।

मम्मी-पापा के लाडले अभिमन्यु बताते हैं- घर में सभी मुझे बहुत प्यार करते हैं। बचपन में मुझे किसी चीज की कमी नहीं होने दी गई। मेरी प्राइमरी एजुकेशन बुलंदशहर के निर्मल कान्वेंट स्कूल में हुई।

मैंने साल 2007 में सीबीएसई बोर्ड से फर्स्ट डिवीजन में हाईस्कूल पास किया। घर-परिवार के लोग यही कहते कि अभिमन्यु पढ़ाई में होशियार है। मम्मी मुझे रिश्तेदारों की हर बात बताती। उन्होंने मुझे बहुत मोटिवेट किया।

हाईस्कूल के बाद पापा ने मुझे पढ़ने के लिए दिल्ली भेज दिया। पापा चाहते थे कि मैं अच्छी पढ़ाई करूं और उनकी तरह सीए बनूं। दिल्ली में मेरा एडमिशन दिल्ली पब्लिक स्कूल में हुआ। यहां से मैंने 2009 में इंटर पास किया। अच्छे नंबर आए, तो घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

अभिमन्यु बताते हैं कि इंटर पास होने के बाद मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। यहां से मैंने 2012 में फर्स्ट डिवीजन के साथ बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद मैंने 2013 में ICAT दिल्ली से CA की पढ़ाई पूरी की।

अभिमन्यु मांगलिक बताते हैं- CA पूरा होने के बाद अलग-अलग कंपनियों से जॉब ऑफर आने लगे। परिवार भी खुशी था कि बेटा CA बन गया। साल 2013 में RECL में 16 लाख रुपए सालाना पैकेज पर जॉब शुरू कर दी। दिल्ली में जॉब करने के कुछ दिन बाद मेरा प्राइवेट सेक्टर से मोह भंग होने लगा।

मेरी दिलचस्पी सिविल सर्विसेज की तरफ बढ़ने लगी। मैंने इंटरनेट पर UPSC की तैयारी के बारे में जाना। फिर सिलेबस देखने के बाद तैयारी शुरू कर दी। मैंने कभी ये नहीं सोचा कि UPSC क्लियर नहीं कर पाऊंगा।

अभिमन्यु बताते हैं- मैंने पहले जॉब नहीं छोड़ी। जॉब के साथ ही UPSC की तैयारी करता रहा। दूसरी शहरों से अधिक पैकेज की जॉब के ऑफर मिलने लगे। साथ काम करने वाले आगे भी बढ़ गए। लेकिन, मैंने अपनी तैयारी के चलते दिल्ली में रहना सही समझा।

पहले प्रयास में तैयारी ठीक से नहीं रही, तो सफलता भी नहीं मिली। मैं दिन में जॉब पर फोकस करता और रात में 5 से 6 घंटे पढ़ाई। यह बात, जब दोस्तों और अन्य लोगों को पता चली, तो सभी बोले- कहां तुम भी पढ़ाई-लिखाई में लगे हो। अच्छी नौकरी चल रही है, सीए बन गए हो, आगे इसकी क्या जरूरत।

अभिमन्यु कहते हैं- मैं इन सब बातों पर ध्यान नहीं देता। बस मुस्कुरा देता। मुझे पता था कि मेरी नौकरी से मुझे सुकून नहीं मिल रहा। ना ही मैं लोगों की मदद कर पा रहा हूं। इसलिए भी मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी।

अभिमन्यु मांगलिक बताते हैं- 2016 में मैंने अपनी जॉब छोड़ दी। मैंने ठान लिया कि अब चाहे जो हो जाए, मुझे हर हाल में यूपीएससी पास करना है।

इसके बाद मैंने जब परीक्षा दी, तो मुझे यकीन हो गया कि अबकी मेरा सिलेक्शन हो जाएगा। प्री से लेकर इंटरव्यू तक, सबकुछ बेहतर रहा। रिजल्ट आया, मैं क्वालिफाई हो गया। यह बात जब घर-परिवार में पता चली, तो बधाई देने वालों की भीड़ लग गई। मेरे दोस्तों को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैंने UPSC क्रैक कर लिया है, लेकिन इंटरव्यू, अखबार में फोटो देख सभी को विश्वास हो गया।

अभिमन्यु बताते हैं- ट्रेनिंग के बाद मेरी पहली पोस्टिंग बरेली में हुई। यहां फरीदपुर और दूसरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ड्रग्स सप्लाई होती थी। बरेली में अलग-अलग गैंग दूसरे प्रदेशों से ड्रग्स लाकर ऑन डिमांड सप्लाई करते थे। मैंने सबसे पहले गैंग्स की लिस्टिंग की। फिर इनके परिवार की जांच कराई।

गैंग में माफिया के परिवार की महिलाएं तक शामिल थीं। हमने टीम बनाई, इसके बाद मुखबिरों का नेटवर्क एक्टिव किया। हर दिन हमने एक-एक गैंग को ट्रेस करने की रणनीति पर काम किया। हमें पहली बार फरीदपुर में सफलता मिली। यहां एक कार से 3 युवकों को अरेस्ट किया। इनके पास से 20 लाख रुपए की ड्रग्स मिली। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह इसे पीलीभीत में सप्लाई करने वाले थे।

इन आरोपियों की निशानदेही पर हमने 10 से ज्यादा लोगों को पकड़ा। इसके बाद पूरे नेक्सेस पर हमें लीड मिलती गई। सिविल ड्रेस में हमारी टीमें ड्रग्स माफिया के पीछे लग गईं। सीनियर अफसरों का पूरा सपोर्ट मिला। हमने 8 गैंग के खिलाफ अभियान चलाया।

3 महीने के अभियान में 200 ड्रग्स डीलर पर एक्शन लिया गया। इनको वेरिफाई किया गया। कई बड़े माफिया तो जिला छोड़कर फरार हो निकले। बरेली में मेरा एक्सपीरियंस अच्छा रहा। यहां मैंने साइबर क्राइम से जुड़े केस भी इन्वेस्टिगेट किए।

अभिमन्यु मांगलिक बताते हैं- बरेली के बाद मेरी दूसरी पोस्टिंग वाराणसी में हुई। यहां ASP कैंट की जिम्मेदारी मिली। नवंबर 2020 की बात है। कुख्यात मोनू चौहान अपने गैंग के साथ लगातार व्यापारियों से लूट कर रहा था। उसने एक महिला को गोली मार दी थी। उस समय अमित पाठक सर एसएसपी थे। सारनाथ थाना क्षेत्र में पुलिस संदिग्ध लोगों की चेकिंग कर रही थी।

पुलिस को सूचना मिली कि मोनू चौहान बाइक से आ रहा है। सारनाथ पुलिस एक्टिव होती, इससे पहले ही मोनू चौहान ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसमें एक कॉन्स्टेबल और दरोगा घायल हो गए। हमें कन्फर्म हो गया कि फायरिंग करने वाला मोनू चौहान ही है। फायरिंग की सूचना पर हम सभी अलर्ट हो गए। टीमें क्राइम स्पॉट पर पहुंच गईं। इस कुख्यात की घेराबंदी की गई।

अभिमन्यु मांगलिक कहते हैं- शाम का समय था, अंधेरा बढ़ रहा था। मोनू चौहान लगातार पुलिस को निशाना बनाते हुए फायरिंग कर रहा था। करीब 20 मिनट तक उसने गोली चलाई होंगी। पुलिस टीम भी जवाबी कार्रवाई कर रही थी। 20 मिनट बाद जब सामने से कोई हलचल नहीं हुई, तब हम मौके पर पहुंचे। देखा, मोनू को गोली लगी है। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

यहां चेकअप के बाद डॉक्टर ने मोनू को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मौके से एक बाइक के अलावा पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए थे। मोनू चौहान की केस डायरी अपराध से भरी हुई थी। वह 18 बड़े क्राइम में इन्वॉल्व था। उसने 2020 में धनतेरस पर शहर के बड़े व्यापारी श्याम बिहारी की लूट के बाद हत्या कर दी थी।

मोनू की गैंग से यूपी एसटीएफ की 2015 में मुठभेड़ हुई थी, जिसमें गैंगस्टर सनी मारा गया था। इस घटना में भी मोनू चौहान था। मोनू पुलिस को देखते ही सीधे गोली चलाता था। उस पर एक लाख का इनाम घोषित किया गया था।

ब्यूरो रिपोर्ट